Monday, 11 July 2011

प्यार का दस्तूर

पतझड़ के बाद मौसम बरसात का आएगा!
हर गरजते बादल के साथ उनके आँखो से आसू बरस जाएगा!
बस इतना रखना ख़याल की हर दुआ हमारी खुशी ही आपके दामन मैं लाएगी!
मेरी हर साँस उसकी कीमत चुकाएगी!
हसते हसते फिर मौत ह्यूम गले लगाएगी!
ओर हम कहेंगे - कैसे भुलाये उनको? क्या यही प्यार का दस्तूर है?
मौत कहेगी हमसे प्यार किया तूने उस से यही तेरा कसूर है...!

No comments:

Post a Comment