Monday, 11 July 2011

देखो वक़्त हमे बुढापेके करीब लेके जा रहा है

देखो वक़्त हमे बुढापेके करीब लेके जा रहा है,
बचपन का हर एक लम्हा आंखो मैं नजर आ रहा है!
वो बचपन की मस्ती, वो उडती धूल, वो सोच मैं रहेना की कैसे खिलते है फुल!
वो रातो के तारे टिम - टीमते लाखो सितारे इस जहासे सब कितने लगते थे प्यारे!
वो पापा की डात, वो मां का प्यार और दोस्तो का कहेना अरे छोड ना यार!

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